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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी केजरीवाल और ममता बनर्जी सरकार ने अनाथ बच्चों के लिए कुछ नहीं

नई दिल्ली, 10 जून। भाजपा सांसद श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज दिल्ली की केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की ममता बैनर्जी सरकार पर  आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकारों को इस बात के लिए फटकार लगाई गई है कि आखिर क्यों कोरोना महामारी में जिन लोगों की मृत्यु हो गई है उनके बच्चों के लिए कोई सहायता नहीं की गई। ऐसे अनाथ  बच्चों की पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ जमीन और संपत्ति को सुरक्षित करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है लेकिन वे इस बारे में कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है।

उन्होंने कहा कि आज जिन बच्चों ने अपने मां-बाप को खोया है, उनका कोई नहीं है। इसलिए केजरीवाल सरकार से सवाल है कि ऐसे बच्चों के लिए उनकी सरकार क्या कर रही है, क्योंकि पीएम केयर फंड से मिलने वाली सहायता को रोककर वे सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। उनका कोई इरादा इन मासूम बच्चों को सहायता पहुँचाने का नहीं है। प्रदेश कार्यालय में हुए प्रेसवर्ता में श्रीमती लेखी के साथ प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख श्री नवीन कुमार उपस्थित थे।


श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा वन नेशन वन राशन कार्ड को लागू न करने की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार यह बखूबी जानती है कि दिल्ली प्रवासियों का शहर है और यहां राशन कार्ड और निवास के मुद्दे हमेशा बने रहते हैं। केजरीवाल घर-घर राशन न पहुंचने की योजना के लिए केंद्र सरकार को कोसते हैं, लेकिन केंद्र की योजना को लागू न करने के लिए चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्य सरकारें और विपक्ष वैक्सीन और अनाथ बच्चों को लेकर राजनीति कर रही थी उसकी सच्चाई सबके सामने आ चुकी है।


श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि केजरीवाल हर समय जवाबदेही से बचते हैं और वह चाहे राशन का मुद्दा हो या फिर अनाथ बच्चों का। वे विज्ञापन जैसे मुद्दे को उभारते हैं लेकिन जन एवं बाल कल्याण के किसी भी कार्य में उनकी रुचि नहीं दिखती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विज्ञापन के दम पर जिंदा केजरीवाल सरकार ने महामारी के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग के बजट को विज्ञापनों में खर्च कर दिया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार जनकल्याण मुद्दों पर जवाबदेही से बचती रहती है और गैर जरूरी मुद्दों को विज्ञापन के माध्यम से उछालती रहती है। 


उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मामले में केजरीवाल से कम नहीं है जो अपने कहे पर कभी नहीं टिकती। यह दोनों सरकारें कुछ ना कर पाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराती है चाहे वह टीकाकरण का मुद्दा हो या कोई अन्य मुद्दा। पहले इन दोनों नेताओं ने अपने हिसाब से केंद्र से टीकाकरण की अनुमति मांगी। और जब अनुमति मिल गई तब राज्य में भ्रष्टाचार और काम ना करने की आदत के चलते केंद्र पर आरोप जड़ते हुए इसे फिर से केंद्र को सम्भालने की बात कहने लगे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और ममता बनर्जी दोगले हैं यह स्पष्ट हो चुका है।