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उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स (एसीई) उद्योग ने सरकार से घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सहयोग करने का अनुरोध किया

L-R, Sandeep Ladda, Partner Technology Sector, PwC India_ Dr Ajay Kumar, Additional Secretary, Meity_ Mr Manish Sharma, President CEAMA_

L-R, Sandeep Ladda, Partner Technology Sector, PwC India_ Dr Ajay Kumar, Additional Secretary, Meity_ Mr Manish Sharma, President CEAMA_

 

नई दिल्ली,  उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स (एसीई) उद्योग की शीर्ष संस्था कंज्यूमर इलेक्ट्राॅनिक्स एंड अप्लाइऐंसेज मैन्य ूफेक्चरर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) ने ‘भारतीय उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स में बदलाव का समर्थन’ पर केन्द्रित अपना 38वां वार्षिक कार्यक्रम पूरा किया। यहाँ उद्योग विशेषज्ञों ने नीति में बदलाव पर अपनी राय रखी और इस क्षेत्र में वृद्धि बढ़ाने के
लिये अपनी अनुशंसाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर नीति आयोग के मुख्य कार्य कारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत, इलेक्ट्राॅनिक्स एवं सूचना तकनीकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डाॅ. अजय कुमार, पीडब्ल्य ूसी म े ं तकनीक प्रमुख श्री स ंदीप लड्ढा, सीईएएमए क े प्रेसिड े ंट श्री मनीष शर्मा, सीईएएमए उत्तर के वाइस प्रेसिडेंट श्री सुनील वाचानी, सीईएएमए पश्चिम के वाइस प्रेसिडेंट श्री कमल नंदी और
सीईएएमए के अन्य महानुभाव उपस्थित हुए।

इसके अतिरिक्त, पीडब्ल्यूसी के साथ मिलकर सीईएएमए ने ‘भारतीय उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स (एसीई) उद्योग परिवर्तन का समर्थ न’ पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। केवल 9 प्रतिशत अनुमानित सीएजीआर के साथ, पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट कहती है कि उत्पादन की अक्षमता और सीमित मौलिक वातावरण निम्न स्तर के मूल्यवर्द्धन की जड़ हैं।

अगले 5 वर्षों में बड़ी जनसंख्या और जीडीपी की वृद्धि भारतीय इलेक्ट्राॅनिक्स उद्योग को शीर्ष पर पहुँचाने वाले प्रमुख कारक होंगे। रिपोर्ट में
भारत सरकार द्वारा शून्य आयात के लिये इलेक्ट्राॅनिक्स उत्पादन को बढ़ाने और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में एसीई उद्योग को आगे रखने का उल्लेख भी है। इस कदम से घरेलू उत्पादन वर्ष 2016-17 में 64752 करोड़ रूपये का हुआ, जो कि वर्ष 2015-16 में 55765 करोड़ रूपये का था।
अपने विचार व्यक्त करते हुए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत ने कहा, ‘‘उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स (एसीई) का क्षेत्र विकास के भारी अवसर प्रस्तुत करता है, न केवल उपभोग, बल्कि उत्पादन और रोजगार निर्माण के संदर्भ में भी। यह आगे बढ़ने वाले उन उद्योगों में से एक है, जिन्होंने अपनी व्यावसायिक रणनीतियों को सरकार की विभिन्न पहलों जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और डिजिटल इंडिया’ से सफलतापूर्वक जोड़ा है। सरकार द्वारा प्रस्तावित नीतिगत पहलों को छोटे और मझोले उद्यमों की सहायता के लिय े विशेष रूप से तैयार किया गया है।

सीईएएमए ने इन छोटे और मझोले उद्यमों को अपनी राय रखने और सरकार की नीति एवं वृद्धि की चर्चाओं में शामिल
होने का एक मंच दिया है।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सीईएएमए के प्रेसिडेंट श्री मनीष शर्मा ने कहा, ‘‘सीईएएमए की स्थापना उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स उद्योग (एसीई) की उभरती समस्याओं को संबोधित करने और सरकार की नीतियों के साथ जुड़ने के मूल्यांकन और समर्थन के उद्देश्य से की गई थी।

इस रिपोर्ट को जारी करने के पीछे वर्तमान वातावरण में उद्योग की चुनौतियों को सामने लाने  और लगातार बदलते व्यापारिक पर्यावरण, विशेषकर स्थानीय उत्पादन को सहयोग के लिये आवश्यक नीतिगत रूपरेखा बनाने का लक्ष्य था। कंज्यूमर ड्यूरेबल उद्योग प्रत्य ेक प्रत्यक्ष रोजगार के लिये 3 अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करता है, इसलिये नियुक्ति योग्य अधिक श्रमिकों के लिये स्थानीय उत्पादन
की रूपरेखा में सुधार करने हेतु सरकार के साथ घनिष्ठता से कार्य करना आवश्यक है।’’

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