बरसाना धाम में लड्डू होली की

आज श्री किशोरी जी की सखियां नन्दगाँव नन्दलाला को होली का निमन्त्रण देने जाती हैं जहां उनकी खूब आवभगत होती है।

सखियों द्वारा होली का न्यौता देने के बाद आज शाम को नंदलाला स्वरुप पांडा बरसाना आता है। जिसके स्वागत में बरसाना आये श्रद्धालु व रसिक उस पांडे को लड्डुओं का भोग लगाते हैं।

वह नाचते हैं लड्डू खाते हैं और श्रद्धालुओं में लुटाते हैं और फिर कल नन्दलाला अपने सखाओं के साथ पाग पहनकर ढाल लेकर आएंगे और सीधे पहुचेंगे किशोरी जी के निज महल में वहां बरसाना के गोस्वामी समाज और नन्द गाँव के गोस्वामी समाज के द्वारा होली पद गायन होगा।

अष्टमी अर्थात आज के दिन नन्दगाँव से पाण्डे जी होरी का निमंत्रण लेकर आते हैं तो लड्डू होरी में यह पद गाया जाता है–

नन्दगाँव कौ पाँडे ब्रज बरसाने आयौ ।
भरि होरी के बीच सजन समध्याने धायौ ॥
पाँड़े जू के पायनि कों हँसि शीश नवायौ ।
अति उदार वृषभानु राय सन्मान करायौ ॥
पाँय धुवाय अन्हवाई प्रथम भोजन करवायौ ।
भानु भवन भई भीर फाग कौ खेल मचायौ ॥
समध्याने की गारी सुनत श्रवण सुख पायौ ।
धाई आई और सखी जिनि सोंधो नायौ ॥
शीशी सर ते ढोरी फुलेल अंग झलकायौ ।
हनुमान की प्रतिमा मानौ तेल चढायौ ॥
काजर सों मुख माढ़यौ वन्दन बिन्दु बनायौ ।
कारे कर सहि चुवत मनौं चपरा चपकायौ ॥
गज गामिनि गौछनि में तकि तुकमा लपटायौ ।
देह धरें मानों फागुन ब्रज में खेलन आयौ ॥
माथे तें मोहनी मठा कौ माट ढ़ुरायौ ।
मानों काचे दूध श्याम गिरवरहि न्हवायौ ॥
लियौ लुगाइनि घेरि नरें नाना के आयौ ।
तब श्री राधा राधा कहि अपनौ बोल सुनायौ ॥
चंचल चन्द्र मुखीनि चहुँ धां तें जू दबायौ ।
अहो भानु की कुँवरी शरण हौं तेरी आयौ ॥
कोमल बानी सुनत गरौ राधा भरि आयौ ।
बाबा जू कौ दगल लली जू लै पहिरायौ ॥
कीरति पाँय लागि लागि तातौ पय प्यायौ ।
मनवांछित निधि दीनी तन तें ताप नसायौ ॥