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NDA के Exam में शामिल हो सकती हैं महिलाए

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लड़कियों से जुड़ा एक अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की प्रवेश परीक्षा में बैठने की इजाजत दे दी है। जस्टिस संजय किशन कौल और हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने बुधवार को कुश कालरा द्वारा दायर रिट याचिका में अंतरिम आदेश पारित किया। इसमें महिला उम्मीदवारों को एनडीए परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं को परीक्षा में ना बैठने देना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 का उल्लंघन है। 


याचिका में कहा गया है कि अधिकारी बारहवीं परीक्षा पास अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों को ‘राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौसेना अकादमी की परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हैं, लेकिन योग्य एवं इच्छुक महिला उम्मीदवारों को परीक्षा देने की अनुमति महज लिंग के आधार पर नहीं देते हैं। इसमें संविधान के तहत कोई उचित कारण भी नहीं दिए जाते हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल आए उस फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जिस तरह कोर्ट ने सेवारत महिला सैन्य अधिकारियों को पुरुषों से बराबरी का अधिकार दिया, वैसा ही उन लड़कियों को भी दिया जाए जो सेना में शामिल होने की इच्छा रखती हैं। 


याचिका में बताया गया था कि लड़कों को नेशनल डिफेंस एकेडमी और नेवल एकेडमी में 12वीं कक्षा के बाद शामिल होने दिया जाता है, लेकिन लड़कियों के लिए सेना में शामिल होने के जो अलग-अलग विकल्प हैं। उनकी शुरुआत ही 19 साल से लेकर 21 साल तक से होती है। उनके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता भी ग्रेजुएशन रखी गई है। ऐसे में जब तक लड़कियां सेना की सेवा में जाती हैं, तब तक 17-18 साल की उम्र में सेना में शामिल हो चुके लड़के स्थायी कमीशन पाए अधिकारी बन चुके होते हैं। इस भेदभाव को दूर किया जाना चाहिए।