SC के मजबूर जजों से बात कर सकते हैं चीफ जस्टिस, बुलाई अहम बैठक

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नई दिल्लीः देश के इतिहास में ये पहली बार देखने को मिला जब देश की जनका तो न्याय देने वाले जज खुद जनता के सामने न्याय की गुहार लगाते दिखे। ये पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने मीडिया को संबोधित किया। बकायदा जजों ने प्रेस कान्फ्रेंस करके मीडिया से बात की और न्यायपालिका में हो रही गड़बड़ी के बारे में बताया और अपनी मजबूरी भी बताई। जजों ने कहा कि कर्ट का प्रशासन ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा, अगर एेसा चलता रहा तो लोकतंत्र को खतरा हो सकता है।

वहीं जजों ने चीफ जस्टिस के बारे में भी कहा कि उन्होनें ने भी हमारी बात नहीं सुनी। वहीं इन आरोपों को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा आज सुप्रीम कोर्ट के जजों से बातचीत कर सकते हैं।

इस संबंध में बार एसोसिएशन ने आज शाम चार बजे बैठक बुलाई है।वहीं अटॉर्नी जनरल ने उम्मीद जताई है कि आज विवाद सुलझ सकता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि देशवासियों में भ्रम पैदा करना जुडिशियरी के लिए ठीक नहीं है।सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा बगावती तेवर अपनाए जाने और के बाद चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सब जज बराबर हैं और स्वतंत्र माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सभी केसों का सही बंटवारा होता है। बता दें कि सवाल उठाने वाले सुप्रीम के चार जज, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने इन्हीं दो बातों को प्रमुख रूप से अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था।

आपको बता दें कि शुक्रवार सुबह देश में पहली बार न्यायपालिका में असाधारण स्थिति देखी गई। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया। चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी।

चारों जजों ने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की। उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जो कि प्रशासन के बारे में थे, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे।  चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं। जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए।

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