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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित संगीत समारोह

स्मारोह की शुरूआत संगीत समारोह में भाग लेने वाले प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत के साथ हुई। समारोह में पहली प्रस्तुति के तौर पर विदुषी श्रुति अधिकारी का युगल संतुर गायन था जिसमें उनका साथ दिया उनके होनहार पुत्र निनाद ने। दोनों ने परम्पारिक अलाप जोड झाला के साथ राग किरवानी की प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्होंने आनंदित करने वाला विलम्बित की प्रस्तुति दी। इसके अलावा उन्होंने रूपक ताल (सात सुर) तथा तीन ताल (16 ताल) प्रस्तुत किया। दोनों ने दो सौ तारों की कंपन से संगीत की ऐसी जुगलबंदी प्रस्तुत कि हर दर्शक मां और बेट के समायोजन और कौशल से अभिभूत हो गए। मां-बेटे के बीच के प्यार और एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना हर तान और तिहाई में झलकती थी और दर्षकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्द्धन किया। उन दोनों कलाकारों का साथ तबला पर अभिजीत ऐच ने साथ दिया।


इसके बाद जानी मानी भरत नाट्यम नृतकी विदुषी कनक सुधाकर और उनकी प्रतिभाषाली पुत्री अपराजिता ने यादगार प्रस्तुति दी। मां-बेटी ने अपने नृत्य के जरिए विभिन्न भावनाओं को प्रस्तुत किया। दोनों ने रामायण के अनेके दृश्यों पर भी प्रस्तुति दी। मां और पु़त्री की इस बेहतरीन प्रस्तुति ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के समारोह को परिपूर्ण कर दिया।
इस समारोह में अनेक गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिष्ठित पत्रकारों के अलावा प्रख्यात कलाकार भी उपस्थित थे जिनमें पंडित चेतन जोशी (बांसुरी), उस्ताद असगर हुसैन (वायलिन वादक), श्री अजय झा (मोहन मीणा), श्री सुब्रत डे (सितारवादकी), श्री देबाशीष आधिकारी (तबला) प्रमुख हैं। इस मौके पर प्राचीन कला केन्द्र के रजिस्ट्रार गुरू डा. शोभा कोसर (एसएनए पुरस्कार विजेता कथक गुरू) भी मौजूद थे। श्री सजल कौसर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस संगीत समारोह का यादगार समापन हुआ।
संगीत और नृत्य के जरिए मातृत्व के इस उत्सव के इस सफल आयोजन के साथ प्राचीन कला केन्द्र के साथ गौरव का एक और अध्याय जुड़ गया है। प्राचीन कला केन्द्र का मुख्यालय चंडीगढ़ में है जो पूरे भारत में भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य को बढ़ावा देने तथा कलाकारों के कल्याण के लिए यादगार संगीत समारोहों का अयोजन करता है। 

भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और उससे संबंधित कला शैलियों का इतिहास हजारों साल पहले का है। यह कला पीढ़ी दर पीढी विकसित हुई और आज भी अपना वजूद बनाए हुए है और यहां तक कि आज यह अविश्वनीय कला के रूप में विकसित हुई है। कहा जाता है कि कला मानवता की आत्मा है जो जीवन के सृजन के साथ शुरू हुई। यह अनंत संभावनाओं का जनक है। उसी तरह से जैसे जीवन का सृजन मां और उसकी अंतहीन ममता के साथ शुरू हुआ और ऐसे में प्यार, देखभाल और पालन-पोषण को कला के माध्यम से उजागर करना और उसका जश्न मनाना बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसी के मद्देनजर प्राचीन कला केन्द्र की 15 वीं तिमाही सभा में ‘‘लीजेंड्स आफ टुमारो’’ नामक श्रंखला के तहत इस सप्तांह ‘‘मातृ शक्ति’’ का जश्न मनाने के लिए संगीत समारोह का आयोजन किया गया। मंडी हाउस के त्रिवेणी कला संगम में दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में आयोजित संगीत समारोह में दिग्गज कलाकारों ने अपनी प्रतिभाशाली संतानों के साथ यादगार  प्रस्तुति दी।